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हिंदी में इंग्लिश चेम्पने का हंसमुखी प्रयास ! ( एक ही बात को दोनों ( हिंदी + “अंग्रेजी” ) शब्दों में जबरन ठूंसा है , ” अंग्रेजी ” शब्दों को ) अगर ….समय हो…. तो ही पकियेगा !!!
आरम्भ की “इस्टार्टिंग” से ले के आख़िरी की “फिनिश” तक पढ़ कर टपकियेगा ?
ये ” आप ” को समझाना बहुत “इजी” आसान है। लेकिन फिर भी, “आल टू आल” सब भेजे के ” माइंड ” में आये , इसलिए ध्यान देना ज्यादा “बेटर” रहेगा।
अब तीन लोग “ट्रिपल” निकल लेते हैं। अकेली ” सिंगल ” लेडीज़ को घूरते हैं। वो तेज “फास्ट” चलती है । पहले “फर्स्ट” बाजार में पहुँच कर ठंडा “कोल्ड ड्रिंक ” पीती है। “आर्डर” बोलती है , भैय्या , एक गिल्लास आम का “मैंगो जूस” देना जरा । दुकानवाला “बिल” की पर्ची , “रिटन” में लिखकर देता है। लड़की वापसी में “रिटर्न” जल्दी से आती है। उसके घर के आगे, सामने वाली “फ्रंट साइड” में गाड़ी खड़ी रहती है। दाहिने हाथ पर “राइट साइट” में उसके पप्पा ” डेड ” खड़े हैं। उसके घर के बाहर “आउटडोर”, अंदर “इनडोर”, और जमीन के अंदर, “अंडर-ग्राउंड बेसमेंट” के नीचे पाताल है।
वो गोल “राउंड” लगाती हैं। बीचम बीच में “सेंटर” मिलाती हुई सीधी “स्ट्रैट लाइन” में चलती है । “संडे” रविवार के रोज दोपहर में “लंच” और रात को “डिनर” करती है । हल्का “लाइट” ही खाती है । “लास्टम लास्ट” वाली आखरी लाइन में बैठने की “सीट” पर ही बैठती हैं। वो भी सबेरे-सबेरे “अर्ली मॉर्निंग वॉक” घूमने जाती है इसलिए तो दिन-भर ताजा “फ्रेश” रहती है । हवाई जहाज में बैठकर ऊपर से “बाय-एयर” बंबई जा रही है । ” आप ” भी “आउट ऑफ़ स्टेशन” बाहर गांव घूम आओ। वहां “वैकेन्सी” खाली रहती हैं ।

यदि लिखने में गलती से “मिस्टेक” हो गई हो, तो “सॉरी” माफ़ करना भाई ।
लेकिन हलके पतले में “लाइट” ले लेना । नहीं तो पक कर टपक जायेंगे ???

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