हम अपनी हंसमुखी पत्नी जी के लिए बेर खरीद लाये , देखते ही बोली :- चखकर खिलाती हूँ !
हमने सोचा ये सबरी की आत्मा कहाँ से आ गयी ?
हमने कहा :- भावना अच्छी है ! इतना सुनते ही रहस्यमयी अंदाज़ में एक बेर चखकर हमें टिकाया , जैसे ही हमने चखा , इतना खट्टा , कि क्या बताएं ?
इसके पहले कि हम कुछ कह पाते , वो बोली :- भावना अच्छी है , हमारी भी फेसबुक फ्रेंड है , बता रही थी कि ” अंकल जी , आज कल फेसबुक पर मीठी – मीठी बातों से ज्यादा पका रहे हैं , कहीं आपको शुगर न हो जाए इसलिए ….

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