पुरानी , पुनः प्रकाशित , दशहरे की पोस्ट :- आपको विजयादशमी की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ , पूरा पकिये ??

दशहरे के दिन , रावण को जलाने से ठीक पहले आवाज़ आयी ! हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा !
दशानन सामने खड़े थे ,
“एक इंटरव्यू हो जाए रावण जी के साथ :-
ओह अच्छा ! तो आप ही हो श्रीमान रावण ! एक बात बताओ..ये दस-दस मुंह संभालने पर थोड़ी मुश्किल नहीं हो जाती आपको ? मेरा मतलब शैम्पू वगैरह करते टाइम..यू नो…और कभी सर दर्द शुरू हो जाए तो पता करना मुश्किल हो जाता होगा कि कौन से सर में दर्द हो रहा है…?
रावण – पहले ये बताओ तुम लोग कैसे डील करते हो इतने सारे मुखोटों से ? हर रोज चेहरे पे एक नया मुखोटा , उस पर एक और मुखोटा , उस पर एक और कभी हँसमुखी चाहे बीबी से पिटकर आये हो क्यों ! यार एक ही मुंह पर इतने नकाब…थक नहीं जाते ?
अरे-अरे आप तो सिरियस हो गए रावण जी …मै तो वैसे ही… अच्छा ये बताओ मैंने सुना है आप कुछ ज्यादा ही अहंकारी हो ?
रावण- हाहाहाहाहाहाहा , हा हा हा हा हा !
अब इसमे हंसने वाली क्या बात थी , कोई जोक मारा क्या मैंने ?
रावण- और नहीं तो क्या…एक ‘कलियुगी इन्सान’ के मुंह से ये शब्द सुनकर हंसी नहीं आएगी तो और क्या होगा ? तुम लोग एक छोटी मोटी डिग्री क्या ले लो, अँग्रेजी के दो-चार अक्षर क्या सीख लो, यूं इतरा के चलते हो जैसे तुमसे बड़ा ज्ञानी कोई है ही नहीं इस धरती पे ! एक तुम ही समझदार ,बाकी सब गँवार ! और मैंने चारों वेद पढ़ के उनपे टीका टिप्पणी तक कर दी ! चंद्रमा की रोशनी से खाना पकवा लिया ! इतने-इतने क्लोन बना डाले, दुनिया का पहला विमान और खरे सोने की लंका बना दी ! तो थोड़ा बहुत घमंड कर भी लिया तो कौन आफत आ पड़ी… हैं , आज किसी अमीर को घमंडी कह सकते हो ?
चलो ठीक है बॉस,ये तो जस्टिफ़ाई कर दिया आपने, लेकिन…लेकिन गुस्सा आने पर बदला चुकाने को किसी की बीवी ही उठा के ले गए ! ससुरा मजाक है का ? बीवी न हुई छोटी मोटी साइकल हो गयी…दिल किया, उठा ले गए बताओ !
(एक पल के लिए रावण महाशय तनिक सोच में पड़ गए, हमारे चेहरे पर एक विजयी हंसमुखी मुस्कान आने ही वाली थी कि फिर वही इरिटेटिंग अट्टहास )
हाहाहाहाहाहहह लुक हू इज़ सेइंग ! अरे ! मैंने श्री राम की पत्नी का हरण किया , मानता हूँ बहुत बड़ा पाप किया और उसका परिणाम भी भुगता ,पर मेघनाथ की कसम-कभी जबरदस्ती तो दूर…हाथ तक नहीं लगाया,उनकी गरिमा को रत्ती भर भी ठेस नहीं पहुंचाई और तुम.. तुम कलियुगी इन्सान !! छोटी-2 बच्चियों तक को नहीं बख्शते ! अपनी हवस के लिए किसी भी लड़की को शिकार बना लेते हो…कभी जबरदस्ती तो कभी झूठे वादों,छलावों से ! अरे तुम दरिंदों के पास कोई नैतिक अधिकार बचा भी है भी मेरे चरित्र पर उंगली उठाने का ?? फोकट में ही पका रहे हो ?
इस बार शर्म से सर झुकाने की बारी मेरी थी…पर मै भी ठहरा पक्का ‘इन्सान’ ! मज़ाक उड़ाते हुए बोला…अरे जाओ-जाओ अंकल ! दशहरा आज ही है, सारी हेकड़ी निकाल देंगे देखना ?
(और इस बार लंकवेशवर जी इतनी ज़ोर से हँसे कि , मैं गिरते-गिरते बचा !)
यार तुम तो नवजोत सिंह सिद्धू के भी बाप हो ,बिना बात इतनी ज़ोर-2 से काहे हँसते हो…ऊपर से एक भी नहीं दस-दस मुंह लेके, कान का पर्दा फाड़ दोगे, जरा और ज़ोर से हंसो तो !
रावण- यार तुम बात ही ऐसी करते हो । वैसे कमाल है तुम इन्सानो की भी..विज्ञान में तो बहुत तरक्की कर ली पर कॉमनसेंस एक धेले का भी नहीं ! हर साल मेरा पुतला भर जला के खुश हो जाते हो बस ……घुटन मुझे होती है तुम लोगों का लैवल देख कर…मतलब जानते नही दशहरा का ,बदनाम मुझे हर साल फालतू में करते हो
किसी दिन टाइम निकाल कर तुम सब अपने अंदर के रावण को देख सको तो पता चले की क्या तुम मुझे जलाने लायक हो ??
जलाना छोडो ! तुम आज के तुच्छ इन्सान मेरे पैर छूने के भी लायक नही..
बाकी दिल बहलाने को कुछ भी करो !
आप सभी को दशहरा की हार्दिक शुभ कामनाएं दे तो रहा हूँ पर मेरा मुंह देखने लायक है , क्योंकि
ये बोल कर रावण अकंल निकल लिये लेकिन मुझे मेरा लैवल समझा गये !
हँसते रहिये , हँसाते रहिये !

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